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mahabharat 12.89.3: हे राजन! यदि कोई ब्राह्मण जीविका के अभाव में दुर्बल हो जाए और राज्य छोड़कर अन्यत्र जाने लगे, तो राजा का कर्तव्य है कि वह उस ब्राह्मण के साथ-साथ उसके परिवार के लिए भी जीविका की व्यवस्था करे।   |   mahabharat अध्याय 12.89: राजाके कर्तव्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.89.3 
विप्रश्चेत् त्यागमातिष्ठेदात्मार्थे वृत्तिकर्शित:।
परिकल्प्यास्य वृत्ति: स्यात् सदारस्य नराधिप॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि कोई ब्राह्मण जीविका के अभाव में दुर्बल हो जाए और राज्य छोड़कर अन्यत्र जाने लगे, तो राजा का कर्तव्य है कि वह उस ब्राह्मण के साथ-साथ उसके परिवार के लिए भी जीविका की व्यवस्था करे।
 
O King! If a Brahmin becomes weak due to lack of livelihood and starts leaving the kingdom and goes elsewhere, then it is the duty of the king to arrange livelihood for that Brahmin along with his family.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)