श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.89.26 
एषा ते राष्ट्रवृत्तिश्च राज्ञां गुप्तिश्च भारत।
एतमेवार्थमाश्रित्य भूयो वक्ष्यामि पाण्डव॥ २६॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! मैंने राजा के अपने राष्ट्र के प्रति आचरण का वर्णन किया है। इसी से राजाओं की रक्षा होती है। हे पाण्डुपुत्र! मैं इस विषय पर आगे कहूँगा॥ 26॥
 
Bharatanandan! I have described the behaviour of a king towards his nation. This is how kings are protected. O son of Pandu! I will speak further on this subject.॥ 26॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि राष्ट्रगुप्तौ एकोननवतितमोऽध्याय:॥ ८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें राष्ट्रकी रक्षाविषयक नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८९॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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