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mahabharat 12.89.22: युधिष्ठिर! राजा को इन हिंसक पशुओं और शत्रुओं से सदैव सावधान रहना चाहिए, क्योंकि असावधानी बरतने पर ये गिद्धों की भाँति अचानक आक्रमण कर देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.89: राजाके कर्तव्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.89.22 
एतेभ्यश्चाप्रमत्त: स्यात् सदा शत्रोर्युधिष्ठिर।
भारुण्डसदृशा ह्येते निपतन्ति प्रमादत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! राजा को इन हिंसक पशुओं और शत्रुओं से सदैव सावधान रहना चाहिए, क्योंकि असावधानी बरतने पर ये गिद्धों की भाँति अचानक आक्रमण कर देते हैं।
 
Yudhishthira! A king must always be cautious of these predatory animals and enemies because when one is careless they suddenly attack like vultures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)