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mahabharat 12.89.17-19h: युधिष्ठिर! जो धर्म के ज्ञाता हैं, जो धैर्यवान और शूरवीर हैं, जो युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते, जो राज्य में रहकर जीविका चलाते हैं अथवा राजा के अधीन रहकर जीवनयापन करते हैं, तथा जो मंत्री और तटस्थ वर्ग के लोग हैं, वे चाहे आपकी स्तुति करें या निन्दा करें, उन सबका आपको आदर करना चाहिए॥17-18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.89: राजाके कर्तव्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 17-19h
 
 
श्लोक  12.89.17-19h 
धर्मज्ञानां धृतिमतां संग्रामेष्वपलायिनाम्।
राष्ट्रे तु येऽनुजीवन्ति ये तु राज्ञोऽनुजीविन:॥ १७॥
अमात्यानां च सर्वेषां मध्यस्थानां च सर्वश:।
ये च त्वाभिप्रशंसेयुर्निन्देयुरथवा पुन:॥ १८॥
सर्वान् सुपरिणीतांस्तान् कारयेथा युधिष्ठिर।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो धर्म के ज्ञाता हैं, जो धैर्यवान और शूरवीर हैं, जो युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते, जो राज्य में रहकर जीविका चलाते हैं अथवा राजा के अधीन रहकर जीवनयापन करते हैं, तथा जो मंत्री और तटस्थ वर्ग के लोग हैं, वे चाहे आपकी स्तुति करें या निन्दा करें, उन सबका आपको आदर करना चाहिए॥17-18 1/2॥
 
Yudhishthira! Those who are knowledgeable about Dharma, patient and brave men who never turn their back in a battle, those who live in the kingdom and earn their livelihood or live by being dependent on the king, and the ministers and people of the neutral class, whether they praise you or criticize you, you must respect them all.॥17-18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)