श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.89.16 
जानीयुर्यदि ते वृत्तं प्रशंसन्ति न वा पुन:।
कच्चिद् रोचेज्जनपदे कच्चिद् राष्ट्रे च मे यश:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उनसे यह भी जानना चाहिए कि यदि लोगों को अब से मेरे आचरण के बारे में पता चलेगा, तो क्या वे उसकी सराहना करेंगे। क्या बाहर के गाँवों में तथा सम्पूर्ण राष्ट्र में लोगों को मेरी कीर्ति अच्छी लगती है?॥16॥
 
One should also find out through them whether people will appreciate my behaviour if they come to know about it from now on. Do people like my fame in the villages outside and in the entire nation?॥16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd