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श्लोक 12.89.15  |
अतीतदिवसे वृत्तं प्रशंसन्ति न वा पुन:।
गुप्तैश्चारैरनुमतै: पृथिवीमनुसारयेत्॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| कल तक मेरे आचरण की लोग सराहना करते थे या नहीं? इसका पता लगाने के लिए तुम्हें अपने विश्वस्त गुप्तचरों को संसार के सभी भागों में भेजना चाहिए ॥15॥ |
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| Do people appreciate my conduct till yesterday or not? To find out this, you should send your trusted spies to all parts of the world. ॥ 15॥ |
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