Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.89.14: मुझमें कौन-सी दुर्बलता है, किस प्रकार की आसक्ति है, वह कौन-सी बुराई है जो अब तक दूर नहीं हुई और जिसके कारण मुझ पर दोष लगता है? राजा को इन सब बातों का सदैव विचार करते रहना चाहिए॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.89: राजाके कर्तव्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं छिद्रं को नु सङ्गो मे किं वास्त्यविनिपातितम्।
कुतो मामाश्रयेद् दोष इति नित्यं विचिन्तयेत्॥ १४॥
अनुवाद
मुझमें कौन-सी दुर्बलता है, किस प्रकार की आसक्ति है, वह कौन-सी बुराई है जो अब तक दूर नहीं हुई और जिसके कारण मुझ पर दोष लगता है? राजा को इन सब बातों का सदैव विचार करते रहना चाहिए॥14॥
What weakness do I have, what kind of attachment do I have, what is that evil which has not been removed till now and due to which I am blamed? The king should always keep thinking about all these things.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥