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श्लोक 12.89.13  |
आत्मानं सर्वतो रक्षन् राजन् रक्षस्व मेदिनीम्।
आत्ममूलमिदं सर्वमाहुर्वै विदुषो जना:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! तुम्हें सब ओर से अपनी रक्षा करते हुए सम्पूर्ण पृथ्वी की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि विद्वान पुरुष कहते हैं कि इन सबका मूल अपना रक्षित शरीर ही है॥13॥ |
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| O King! You should protect the whole earth while protecting yourself from all sides, because learned men say that the root of all these is one's own protected body. ॥ 13॥ |
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