श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.89.1 
भीष्म उवाच
वनस्पतीन् भक्ष्यफलान् न च्छिन्द्युर्विषये तव।
ब्राह्मणानां मूलफलं धर्म्यमाहुर्मनीषिण:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! तुम्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि तुम्हारे राज्य में कोई भी उन वृक्षों को न काट डाले जिनके फल खाने के काम आते हैं। बुद्धिमान लोग कहते हैं कि मूल और फल ब्राह्मणों का धन हैं। इसलिए उन्हें काटना उचित नहीं है॥1॥
 
Bhishmaji says - Yudhishthira! You should ensure that no one in your kingdom cuts down those trees whose fruits are used for eating. Wise men say that the roots and fruits are the wealth of Brahmins. That is why it is not right to cut them.॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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