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mahabharat 12.88.6: जिस प्रकार तीखे दांतों वाला चूहा सोते हुए आदमी के पैर के मांस को इतनी कोमलता से काटता है कि आदमी को केवल अपने पैर में कंपन होता है और उसे दर्द का एहसास नहीं होता, उसी प्रकार राजा को भी अपनी प्रजा के साथ कोमलता से व्यवहार करना चाहिए ताकि उसकी प्रजा दुखी न हो।   |   mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.88.6 
यथा शल्यकवानाखु: पदं धूनयते सदा।
अतीक्ष्णेनाभ्युपायेन तथा राष्ट्रं समापिबेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार तीखे दांतों वाला चूहा सोते हुए आदमी के पैर के मांस को इतनी कोमलता से काटता है कि आदमी को केवल अपने पैर में कंपन होता है और उसे दर्द का एहसास नहीं होता, उसी प्रकार राजा को भी अपनी प्रजा के साथ कोमलता से व्यवहार करना चाहिए ताकि उसकी प्रजा दुखी न हो।
 
Just as a rat with sharp teeth bites the flesh of a sleeping man's leg so gently that the man only vibrates his leg and is not aware of the pain. Similarly, a king should deal with his nation with gentle measures so that his subjects are not sad. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)