Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.88.4: जैसे भौंरा फूल और वृक्ष का रस धीरे-धीरे चूसता है, वृक्ष को नहीं काटता। जैसे मनुष्य गाय को बिना कष्ट पहुँचाए धीरे-धीरे दूध देता है, उसके थनों को नहीं कुचलता, वैसे ही राजा को चाहिए कि वह राष्ट्र की गाय को धीरे-धीरे दूध दे, उसे कुचले नहीं। ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.88.4 
मधुदोहं दुहेद् राष्ट्रं भ्रमरा इव पादपम्।
वत्सापेक्षी दुहेच्चैव स्तनांश्च न विकुट्टयेत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जैसे भौंरा फूल और वृक्ष का रस धीरे-धीरे चूसता है, वृक्ष को नहीं काटता। जैसे मनुष्य गाय को बिना कष्ट पहुँचाए धीरे-धीरे दूध देता है, उसके थनों को नहीं कुचलता, वैसे ही राजा को चाहिए कि वह राष्ट्र की गाय को धीरे-धीरे दूध दे, उसे कुचले नहीं। ॥4॥
 
Just as a bumble bee slowly sucks the nectar of a flower and a tree and does not chop the tree. Just as a man milks a cow slowly without hurting the calf and does not crush its udders, similarly a king should milk the nation's cow gently and not crush it. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)