Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.88.33: नरेश्वर! ऐसा करने से तुम्हें तलवार, धन, मित्र और राज्य धारण करने की शक्ति प्राप्त होगी। सत्य और सरलता में तत्पर रहने से तुम मित्र, धन और बल से संपन्न हो जाओगे। 33॥ | mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं दण्डं च कोशं च मित्रं भूमिं च लप्स्यसि।
सत्यार्जवपरो राजन् मित्रकोशबलान्वित:॥ ३३॥
अनुवाद
नरेश्वर! ऐसा करने से तुम्हें तलवार, धन, मित्र और राज्य धारण करने की शक्ति प्राप्त होगी। सत्य और सरलता में तत्पर रहने से तुम मित्र, धन और बल से संपन्न हो जाओगे। 33॥
Nareshwar! By doing this you will get the power to hold the sword, treasure, friends and also a kingdom. By remaining ready for truth and simplicity, you will become rich in friends, treasure and strength. 33॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि कोशसंचयप्रकारकथने अष्टाशीतितमोऽध्याय:॥ ८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कोशसंग्रहके प्रकारका वर्णनविषयक अट्ठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥