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mahabharat 12.88.32: अतः भूपाल! तुम्हें सभी प्राणियों से प्रेम करना चाहिए तथा सत्य, सरलता, अक्रोध और दया आदि उत्तम सिद्धांतों का पालन करना चाहिए॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.88.32 
तस्मात् सर्वेषु भूतेषु प्रीतिमान् भव पार्थिव।
सत्यमार्जवमक्रोधमानृशंस्यं च पालय॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अतः भूपाल! तुम्हें सभी प्राणियों से प्रेम करना चाहिए तथा सत्य, सरलता, अक्रोध और दया आदि उत्तम सिद्धांतों का पालन करना चाहिए॥32॥
 
So Bhupal! You should love all living beings and follow the good principles like truth, simplicity, angerlessness and kindness etc. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)