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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.88.31 
प्राज्ञ: शूरो धनस्थश्च स्वामी धार्मिक एव च।
तपस्वी सत्यवादी च बुद्धिमांश्चापि रक्षति॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
केवल विद्वान, वीर, धनवान, धार्मिक, प्रभुतावान, तपस्वी, सत्यवादी और बुद्धिमान लोग ही लोगों की रक्षा करते हैं।
 
Only learned, brave, rich, religious, lordly, ascetic, truthful and intelligent people protect the people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)