श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.88.28 
नरश्चेत्कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यं चाप्यनुष्ठित:।
संशयं लभते किंचित् तेन राजा विगर्ह्यते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई मनुष्य कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य का कार्य आरम्भ करे और चारों ओर लुटेरों के आक्रमण से उसके प्राण संकट में पड़ जाएँ, तो यह राजा का बड़ा अपमान है ॥28॥
 
If a man starts agriculture, cow protection and commerce and reaches a state of danger to his life due to the attacks of robbers all around, then this is a great insult to the king. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)