Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.88.19: नरेशवर! जैसे राजा अपनी प्रजा के पापों का एक-चौथाई भाग भोगता है, वैसे ही उनके पुण्यों का एक-चौथाई भाग भी उसे प्राप्त होता है; इसलिए राजा को चाहिए कि वह पापियों को दण्ड देकर उनका सदैव दमन करे॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भोक्ता तस्य तु पापस्य सुकृतस्य यथा तथा।
नियन्तव्या: सदा राज्ञा पापा ये स्युर्नराधिप॥ १९॥
अनुवाद
नरेशवर! जैसे राजा अपनी प्रजा के पापों का एक-चौथाई भाग भोगता है, वैसे ही उनके पुण्यों का एक-चौथाई भाग भी उसे प्राप्त होता है; इसलिए राजा को चाहिए कि वह पापियों को दण्ड देकर उनका सदैव दमन करे॥19॥
Nareshwar! Just as the king suffers one-fourth of the sins of his subjects, similarly he also receives one-fourth of their virtues; Therefore, the king should always suppress the sinners by punishing them. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥