Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.88.18: जो राजा उन्हें वश में रखने में समर्थ होते हुए भी उन पर नियंत्रण नहीं रखता, वह स्वयं उनके द्वारा किये गये पापों का एक चौथाई भाग भोगता है, ऐसा श्रुतिका कहती है ॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभुर्नियमने राजा य एतान् न नियच्छति।
भुङ्क्ते स तस्य पापस्य चतुर्भागमिति श्रुति:॥ १८॥
अनुवाद
जो राजा उन्हें वश में रखने में समर्थ होते हुए भी उन पर नियंत्रण नहीं रखता, वह स्वयं उनके द्वारा किये गये पापों का एक चौथाई भाग भोगता है, ऐसा श्रुतिका कहती है ॥18॥
A king who, despite being capable of keeping them under control, does not control them, himself suffers a fourth of the sins committed by them, says the Shrutika. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥