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mahabharat 12.88.13: हे राजन! मैं तुम्हें यह उत्तम उपाय बता रहा हूँ। यहाँ छल या कूटनीति की बात कहने का मेरा कोई उद्देश्य नहीं है। जो लोग उचित उपाय का आश्रय नहीं लेते और मनमाने ढंग से घोड़ों का दमन करना चाहते हैं, वे उन्हें क्रोध दिलाते हैं (जैसे जो लोग गलत उपायों से प्रजा का दमन करते हैं, वे उनके मन में क्रोध उत्पन्न करते हैं)।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.88.13 
उपायान् प्रब्रवीम्येतान् न मे माया विवक्षिता।
अनुपायेन दमयन् प्रकोपयति वाजिन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं तुम्हें यह उत्तम उपाय बता रहा हूँ। यहाँ छल या कूटनीति की बात कहने का मेरा कोई उद्देश्य नहीं है। जो लोग उचित उपाय का आश्रय नहीं लेते और मनमाने ढंग से घोड़ों का दमन करना चाहते हैं, वे उन्हें क्रोध दिलाते हैं (जैसे जो लोग गलत उपायों से प्रजा का दमन करते हैं, वे उनके मन में क्रोध उत्पन्न करते हैं)।॥13॥
 
O King! I am telling you this best method. It is not the intention here to tell me about deceit or diplomacy. Those who do not resort to the right method and want to suppress the horses arbitrarily, they make them angry (similarly those who suppress the people by wrong means, they create anger in their minds).॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)