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mahabharat 12.88.11: तत्पश्चात् राजा को चाहिए कि वह परस्पर झगड़ते हुए लोगों में फूट डालकर उन्हें शांत करे और बिना किसी प्रयास के ही सबके सुख का उपभोग करे ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.88.11 
ततस्तान् भेदयित्वा तु परस्परविवक्षितान्।
भुञ्जीत सान्त्वयंश्चैव यथासुखमयत्नत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा को चाहिए कि वह परस्पर झगड़ते हुए लोगों में फूट डालकर उन्हें शांत करे और बिना किसी प्रयास के ही सबके सुख का उपभोग करे ॥11॥
 
Thereafter the King should create a rift between the people who are arguing with each other and should console them all and should enjoy the happiness of all without any effort. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)