Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.88.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "हे परम बुद्धिमान पितामह! जब राजा पूर्ण रूप से समर्थ हो तथा उसे किसी प्रकार की कोई समस्या न हो, फिर भी यदि वह अपनी सम्पत्ति बढ़ाना चाहे, तो उसे किस प्रकार का उपाय अपनाना चाहिए? कृपया मुझे बताइए।" | mahabharat अध्याय 12.88: प्रजासे कर लेने तथा कोश-संग्रह करनेका प्रकार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
यदा राजा समर्थोऽपि कोशार्थी स्यान्महामते।
कथं प्रवर्तेत तदा तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे परम बुद्धिमान पितामह! जब राजा पूर्ण रूप से समर्थ हो तथा उसे किसी प्रकार की कोई समस्या न हो, फिर भी यदि वह अपनी सम्पत्ति बढ़ाना चाहे, तो उसे किस प्रकार का उपाय अपनाना चाहिए? कृपया मुझे बताइए।"
Yudhishthira asked, "O most intelligent grandfather! When the king is fully capable and has not faced any problem, still if he wishes to increase his wealth, then what kind of method should he adopt? Please tell me."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥