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mahabharat 12.87.21: हे भरतपुत्र युधिष्ठिर! जिस गाय का दूध अधिक नहीं दुहा जाता, उसका बछड़ा उसके दूध के कारण दीर्घकाल तक बलवान और स्वस्थ रहता है और भारी बोझ उठाने का कष्ट सहन कर सकता है। किन्तु जिस गाय का दूध अधिक दुहा जाता है, उसका बछड़ा अपनी दुर्बलता के कारण ऐसा कार्य नहीं कर सकता॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 12.87: राष्ट्रकी रक्षा तथा वृद्धिके उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 87: राष्ट्रकी रक्षा तथा वृद्धिके उपाय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.87.21 
भृतो वत्सो जातबल: पीडां सहति भारत।
न कर्म कुरुते वत्सो भृशं दुग्धो युधिष्ठिर॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र युधिष्ठिर! जिस गाय का दूध अधिक नहीं दुहा जाता, उसका बछड़ा उसके दूध के कारण दीर्घकाल तक बलवान और स्वस्थ रहता है और भारी बोझ उठाने का कष्ट सहन कर सकता है। किन्तु जिस गाय का दूध अधिक दुहा जाता है, उसका बछड़ा अपनी दुर्बलता के कारण ऐसा कार्य नहीं कर सकता॥ 21॥
 
O son of Bharata Yudhishthira! The calf of a cow whose milk is not milked much, becomes strong and healthy for a long time due to its milk and can bear the pain of carrying heavy loads. However, the calf of a cow whose milk is milked too much cannot do such work due to its weakness.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)