Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.87.17-18h: यदि लाभ और श्रम दोनों ही व्यर्थ हों, तो किसी का भी काम करने में मन नहीं लगेगा। अतः राजा को चाहिए कि वह सदैव यह विचार करके कर का निर्धारण करे कि कृषि, वाणिज्य आदि के लाभ में राजा और श्रमिकों दोनों को किस प्रकार भाग मिले। 17 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.87: राष्ट्रकी रक्षा तथा वृद्धिके उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फलं कर्म च निर्हेतु न कश्चित् सम्प्रवर्तते।
यथा राजा च कर्ता च स्यातां कर्मणि भागिनौ॥ १७॥
संवेक्ष्य तु तथा राज्ञा प्रणेया: सततं करा:।
अनुवाद
यदि लाभ और श्रम दोनों ही व्यर्थ हों, तो किसी का भी काम करने में मन नहीं लगेगा। अतः राजा को चाहिए कि वह सदैव यह विचार करके कर का निर्धारण करे कि कृषि, वाणिज्य आदि के लाभ में राजा और श्रमिकों दोनों को किस प्रकार भाग मिले। 17 1/2॥
If both profit and work are useless then no one will be inclined to do any work. Therefore, the king should always decide taxes after considering the way in which both the king and the workers get a share in the profits of agriculture, commerce etc. 17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥