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mahabharat 12.86.27: राजा को चाहिए कि वह ऐसे विद्वान् तपस्वी को देखे जो कुलीन और पाण्डित्य से युक्त हो तथा जिसने समस्त स्वार्थों का त्याग कर दिया हो, उसे शयन, आसन और भोजन देकर उसका आदर करे।   |   mahabharat अध्याय 12.86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.86.27 
सर्वार्थत्यागिनं राजा कुले जातं बहुश्रुतम्।
पूजयेत् तादृशं दृष्ट्वा शयनासनभोजनै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह ऐसे विद्वान् तपस्वी को देखे जो कुलीन और पाण्डित्य से युक्त हो तथा जिसने समस्त स्वार्थों का त्याग कर दिया हो, उसे शयन, आसन और भोजन देकर उसका आदर करे।
 
Seeing a learned ascetic of noble birth and erudition who has renounced all selfish interests, the king should honour him by providing him with a bed, seat and food.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)