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mahabharat 12.86.2: भीष्मजी बोले - हे भारत! कुन्तीनन्दन! जिस नगर में राजा अपने पुत्र, बन्धु-बान्धवों और बन्धुओं के साथ निवास करते हैं, वहाँ की जीविका और सुरक्षा की व्यवस्था के विषय में तुम्हारा पूछना उचित है। 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 86: राजाके निवासयोग्य नगर एवं दुर्गका वर्णन, उसके लिये प्रजापालनसम्बन्धी व्यवहार तथा तपस्वीजनोंके समादरका निर्देश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.86.2 
भीष्म उवाच
वस्तव्यं यत्र कौन्तेय सपुत्रज्ञातिबन्धुना।
न्याय्यं तत्र परिप्रष्टुं वृत्तिं गुप्तिं च भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - हे भारत! कुन्तीनन्दन! जिस नगर में राजा अपने पुत्र, बन्धु-बान्धवों और बन्धुओं के साथ निवास करते हैं, वहाँ की जीविका और सुरक्षा की व्यवस्था के विषय में तुम्हारा पूछना उचित है। 2॥
 
Bhishmaji said – India! Kuntinandan! It is legitimate for you to ask about the arrangements for livelihood and security in the city where the king resides with his son, relatives and friends. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)