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mahabharat 12.85.7-11: राजा को चार वेदज्ञ, निर्भय, बाहर से शुद्ध और स्नातक ब्राह्मणों, आठ बलवान और शस्त्रधारी क्षत्रियों, इक्कीस धनवान वैश्यों, तीन विनम्र शूद्रों, शुद्ध आचरण और विचारों वाले तथा एक सूत वर्ण के पुरुष, जो आठ गुणों से युक्त और पुराणों के ज्ञाता हों, का एक मंत्रिमंडल बनाना चाहिए। वह व्यक्ति लगभग पचास वर्ष की आयु का, निर्भय, कुदृष्टि से रहित, सुनी-सुनाई बातों और स्मृतियों को जानने वाला, विनम्र, विवेकशील, वादी-प्रतिवादी के मुकदमों को निपटाने में समर्थ, लोभ से रहित और सात भयंकर दुर्गुणों से दूर रहने वाला हो। राजा को ऐसे आठ मंत्रियों के साथ गुप्त मंत्रणा करनी चाहिए। 7-11॥   |   mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 7-11
 
 
श्लोक  12.85.7-11 
चतुरो ब्राह्मणान् वैद्यान् प्रगल्भान् स्नातकान् शुचीन्।
क्षत्रियांश्च तथा चाष्टौ बलिन: शस्त्रपाणिन:॥ ७॥
वैश्यान् वित्तेन सम्पन्नानेकविंशतिसंख्यया।
त्रींश्च शूद्रान् विनीतांश्च शुचीन् कर्मणि पूर्वके॥ ८॥
अष्टाभिश्च गुणैर्युक्तं सूतं पौराणिकं तथा।
पञ्चाशद्वर्षवयसं प्रगल्भमनसूयकम्॥ ९॥
श्रुतिस्मृतिसमायुक्तं विनीतं समदर्शिनम्।
कार्ये विवदमानानां शक्तमर्थेष्वलोलुपम्॥ १०॥
वर्जितं चैव व्यसनै: सुघोरै: सप्तभिर्भृशम्।
अष्टानां मन्त्रिणां मध्ये मन्त्रं राजोपधारयेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजा को चार वेदज्ञ, निर्भय, बाहर से शुद्ध और स्नातक ब्राह्मणों, आठ बलवान और शस्त्रधारी क्षत्रियों, इक्कीस धनवान वैश्यों, तीन विनम्र शूद्रों, शुद्ध आचरण और विचारों वाले तथा एक सूत वर्ण के पुरुष, जो आठ गुणों से युक्त और पुराणों के ज्ञाता हों, का एक मंत्रिमंडल बनाना चाहिए। वह व्यक्ति लगभग पचास वर्ष की आयु का, निर्भय, कुदृष्टि से रहित, सुनी-सुनाई बातों और स्मृतियों को जानने वाला, विनम्र, विवेकशील, वादी-प्रतिवादी के मुकदमों को निपटाने में समर्थ, लोभ से रहित और सात भयंकर दुर्गुणों से दूर रहने वाला हो। राजा को ऐसे आठ मंत्रियों के साथ गुप्त मंत्रणा करनी चाहिए। 7-11॥
 
The king should form a cabinet consisting of four Brahmins who are learned in the Vedas, fearless, pure inside and out, and graduates, eight Kshatriyas who are strong in body and armed, twenty-one Vaishyas endowed with wealth, three humble Shudras with pure conduct and thoughts, and a man of the Suta caste who has the eight virtues and is knowledgeable about Puranas. That person should be about fifty years of age and should be fearless, free from evil eyes, full of knowledge of hearsays and memories, humble, sensible, able to settle the cases of plaintiff and defendant, free from greed and should be far away from the seven most dangerous types of vices. The king should hold secret consultations among such eight ministers. 7-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)