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mahabharat 12.85.6: अतः आप मंत्रियों को जिस प्रकार व्यवस्थित करें, अर्थात् उनमें दुर्लभ शील और स्वभाव हो - यह मैं संक्षेप में बताने का प्रयत्न करूँगा ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.85.6 
किंतु संक्षेपत: शीलं प्रयत्नेनेह दुर्लभम्।
वक्ष्यामि तु यथामात्यान् यादृशांश्च करिष्यसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अतः आप मंत्रियों को जिस प्रकार व्यवस्थित करें, अर्थात् उनमें दुर्लभ शील और स्वभाव हो - यह मैं संक्षेप में बताने का प्रयत्न करूँगा ॥6॥
 
Therefore, the manner in which you organize the ministers, that is, they should have a rare modesty and nature - I will try to explain this in brief. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)