Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.85.5: भीष्म बोले, "हे महामुनि! हे परम बुद्धिमान युधिष्ठिर! आप जो कहते हैं, वह ठीक ऐसा ही है। वास्तव में, इन सभी शुभ गुणों से युक्त एक भी व्यक्ति मिलना कठिन है।" ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.85.5 
भीष्म उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ यथा वदसि बुद्धिमन्।
दुर्लभ: पुरुष: कश्चिदेभिर्युक्तो गुणै: शुभै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे महामुनि! हे परम बुद्धिमान युधिष्ठिर! आप जो कहते हैं, वह ठीक ऐसा ही है। वास्तव में, इन सभी शुभ गुणों से युक्त एक भी व्यक्ति मिलना कठिन है।" ॥5॥
 
Bhishma said, "O great sage! O most intelligent Yudhishthira! What you say is exactly like that. In fact, it is difficult to find a single person who is endowed with all these auspicious qualities." ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)