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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.85.34 
एतच्छास्त्रार्थतत्त्वं तु मयाऽऽख्यातं तवानघ।
अविश्वासो नरेन्द्राणां गुह्यं परममुच्यते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप युधिष्ठिर! यही नीति का सिद्धांत मैंने तुम्हें बताया है। किसी पर भी पूर्ण विश्वास न करना राजाओं का सबसे गुप्त गुण कहा गया है।
 
Sinless Yudhishthira! This is the principle of ethics which I have told you. Not trusting anyone completely is said to be the most secret quality of kings.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि अमात्यविभागे पञ्चाशीतितमोऽध्याय:॥ ८५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें मन्त्रीविभागविषयक पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)