Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.85.30-31: जो मंत्री संधि-विग्रह के प्रसंग को जानता हो, धर्मशास्त्र का ज्ञाता हो, बुद्धिमान हो, धैर्यवान हो, लज्जाशील हो, रहस्य का पालन करने वाला हो, कुलीन हो, साहसी हो और शुद्ध हृदय वाला हो, वह श्रेष्ठ माना जाता है। सेनापति को भी इन्हीं गुणों से युक्त होना चाहिए ॥30-31॥ | mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मंत्री संधि-विग्रह के प्रसंग को जानता हो, धर्मशास्त्र का ज्ञाता हो, बुद्धिमान हो, धैर्यवान हो, लज्जाशील हो, रहस्य का पालन करने वाला हो, कुलीन हो, साहसी हो और शुद्ध हृदय वाला हो, वह श्रेष्ठ माना जाता है। सेनापति को भी इन्हीं गुणों से युक्त होना चाहिए ॥30-31॥
A minister who knows the occasion of Sandhi-Vigraha, is a philosopher of theology, is intelligent, patient, shy, keeps secrets, is noble, courageous and has a pure heart is considered the best. The commander should also be equipped with these qualities. 30-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥