vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण
»
श्लोक 3
श्लोक
12.85.3
युधिष्ठिर उवाच
कीदृशैर्व्यवहारैस्तु कैश्च व्यवहरेन्नृप:।
एतत्पृष्टो महाप्राज्ञ यथावद् वक्तुमर्हसि॥ ३॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - महामते ! राजा को किस प्रकार के लोगों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ? कृपया मेरे इस प्रश्न का ठीक-ठीक समाधान कीजिए ॥3॥
Yudhishthir asked – Mahamate! What kind of behavior should the king use for which types of people? Please solve this question of mine correctly. 3॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd