श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.85.3 
युधिष्ठिर उवाच
कीदृशैर्व्यवहारैस्तु कैश्च व्यवहरेन्नृप:।
एतत्पृष्टो महाप्राज्ञ यथावद् वक्तुमर्हसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - महामते ! राजा को किस प्रकार के लोगों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ? कृपया मेरे इस प्रश्न का ठीक-ठीक समाधान कीजिए ॥3॥
 
Yudhishthir asked – Mahamate! What kind of behavior should the king use for which types of people? Please solve this question of mine correctly. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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