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mahabharat 12.85.29: राजा के द्वार पर पहरा देने वाले द्वारपाल में भी ये गुण होने चाहिए। उसके प्रधान रक्षक (या अंगरक्षक) में भी ये गुण होने चाहिए। 29.   |   mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.85.29 
एतैरेव गुणैर्युक्त: प्रतिहारोऽस्य रक्षिता।
शिरोरक्षश्च भवति गुणैरेतै: समन्वित:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजा के द्वार पर पहरा देने वाले द्वारपाल में भी ये गुण होने चाहिए। उसके प्रधान रक्षक (या अंगरक्षक) में भी ये गुण होने चाहिए। 29.
 
The gatekeeper who guards the king's door should also have these qualities. His head guard (or body guard) should also have these qualities. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)