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mahabharat 12.85.27: जो राजा क्षत्रिय धर्म का पालन करता है और अपने स्वामी के आदेशानुसार सत्य बोलने वाले दूत का वध करता है, उसके पितरों को भ्रूण हत्या का फल भोगना पड़ता है। 27.   |   mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.85.27 
यथोक्तवादिनं दूतं क्षत्रधर्मरतो नृप:।
यो हन्यात् पितरस्तस्य भ्रूणहत्यामवाप्नुयु:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो राजा क्षत्रिय धर्म का पालन करता है और अपने स्वामी के आदेशानुसार सत्य बोलने वाले दूत का वध करता है, उसके पितरों को भ्रूण हत्या का फल भोगना पड़ता है। 27.
 
A king who is devoted to the duty of a Kshatriya and who kills a messenger who tells the truth as per the instructions of his master, his forefathers have to suffer the consequences of killing an embryo. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)