Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.85.22: जो राजा को मारना चाहता है, जो गाँव या घर में आग लगाता है, जो चोरी करता है या जो व्यभिचार के द्वारा दुष्प्रचार फैलाने का प्रयत्न करता है, ऐसे अपराधी को अनेक प्रकार से मार डालना चाहिए ॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो राजा को मारना चाहता है, जो गाँव या घर में आग लगाता है, जो चोरी करता है या जो व्यभिचार के द्वारा दुष्प्रचार फैलाने का प्रयत्न करता है, ऐसे अपराधी को अनेक प्रकार से मार डालना चाहिए ॥22॥
One who wishes to kill the king, one who sets fire to a village or a house, one who commits theft or one who tries to spread miscegenation through adultery, such a criminal should be killed in several ways. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥