Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.85.16-17: हे पुरुषश्रेष्ठ! यदि कोई राजा, मंत्री या राजकुमार धर्म के आसन पर या न्याय के आसन पर, जिसका मूल धर्म है, बैठकर धर्मपूर्वक अपनी प्रजा की रक्षा नहीं करता तथा राजा के अनुगामी अन्य राज्याधिकारी यदि स्वयं को अग्रणी रखकर प्रजा के साथ उचित व्यवहार नहीं करते, तो वे भी राजा के साथ नरक में गिरते हैं॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे पुरुषश्रेष्ठ! यदि कोई राजा, मंत्री या राजकुमार धर्म के आसन पर या न्याय के आसन पर, जिसका मूल धर्म है, बैठकर धर्मपूर्वक अपनी प्रजा की रक्षा नहीं करता तथा राजा के अनुगामी अन्य राज्याधिकारी यदि स्वयं को अग्रणी रखकर प्रजा के साथ उचित व्यवहार नहीं करते, तो वे भी राजा के साथ नरक में गिरते हैं॥16-17॥
O best of men! If a king, minister or prince does not protect his subjects in a righteous manner while sitting on the seat of Dharma or the seat of justice, whose root is Dharma, and if the other state officials who follow the king do not behave properly with the subjects by keeping themselves in the forefront, then they too fall into hell along with the king.॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥