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mahabharat 12.85.1: युधिष्ठिर ने पूछा - राजन ! इस संसार में राजा को अपनी प्रजा के नियमों का पालन किस प्रकार करना चाहिए, जिससे वह प्रजा का प्रेम और चिरस्थायी यश प्राप्त कर सके?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 85: राजाकी व्यावहारिक नीति, मन्त्रिमण्डलका संघटन, दण्डका औचित्य तथा दूत, द्वारपाल, शिरोरक्षक, मन्त्री और सेनापतिके गुण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.85.1 
युधिष्ठिर उवाच
कथं स्विदिह राजेन्द्र पालयन् पार्थिव: प्रजा:।
प्रीतिं धर्मविशेषेण कीर्तिमाप्नोति शाश्वतीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - राजन ! इस संसार में राजा को अपनी प्रजा के नियमों का पालन किस प्रकार करना चाहिए, जिससे वह प्रजा का प्रेम और चिरस्थायी यश प्राप्त कर सके?॥1॥
 
Yudhishthira asked - King! In this world, how should a king follow the rules of his subjects so that he can earn people's love and everlasting fame?॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)