Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.84.8: हे प्रभु! जो मनुष्य मधुर वचन बोलता है, वह लोगों से कुछ छीनकर भी, अपने मधुर वचनों से सम्पूर्ण जगत को वश में कर सकता है ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.84: इन्द्र और बृहस्पतिके संवादमें सान्त्वनापूर्ण मधुर वचन बोलनेका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 84: इन्द्र और बृहस्पतिके संवादमें सान्त्वनापूर्ण मधुर वचन बोलनेका महत्त्व  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.84.8 
आदानादपि भूतानां मधुरामीरयन् गिरम्।
सर्वलोकमिमं शक्र सान्त्वेन कुरुते वशे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जो मनुष्य मधुर वचन बोलता है, वह लोगों से कुछ छीनकर भी, अपने मधुर वचनों से सम्पूर्ण जगत को वश में कर सकता है ॥8॥
 
O Lord! A man who speaks sweet words, even by taking away something from people, can subdue the entire world with his sweet words. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)