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mahabharat 12.84.6: जो सबको देखकर पहले उनसे बात करता है और सबसे हँसकर बोलता है, उस पर सब लोग प्रसन्न होते हैं ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.84: इन्द्र और बृहस्पतिके संवादमें सान्त्वनापूर्ण मधुर वचन बोलनेका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 84: इन्द्र और बृहस्पतिके संवादमें सान्त्वनापूर्ण मधुर वचन बोलनेका महत्त्व  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.84.6 
यस्तु सर्वमभिप्रेक्ष्य पूर्वमेवाभिभाषते।
स्मितपूर्वाभिभाषी च तस्य लोक: प्रसीदति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो सबको देखकर पहले उनसे बात करता है और सबसे हँसकर बोलता है, उस पर सब लोग प्रसन्न होते हैं ॥6॥
 
Everyone is pleased with the one who talks to everyone first after seeing them and speaks to everyone with a smile. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)