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यो हि नाभाषते किंचित् सर्वदा भ्रुकुटीमुख:।
द्वेष्यो भवति भूतानां स सान्त्वमिह नाचरन्॥ ५॥
अनुवाद
जो मनुष्य सदैव अपनी भौंहें टेढ़ी रखता है और किसी से बात नहीं करता, वह शान्त भाव (मृदुभाषी होने का गुण) को न अपनाने के कारण सबकी घृणा का पात्र बनता है। ॥5॥
The person who always keeps his eyebrows crooked and does not talk to anybody, becomes the object of hatred of everybody due to not adopting the calm attitude (quality of being soft-spoken). ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥