Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.84.4: चीनी! यह एक ही वस्तु समस्त जगत के लिए सुखदायक है। जो व्यक्ति इसका आचरण करता है, वह सभी जीवों का प्रिय होता है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.84: इन्द्र और बृहस्पतिके संवादमें सान्त्वनापूर्ण मधुर वचन बोलनेका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 84: इन्द्र और बृहस्पतिके संवादमें सान्त्वनापूर्ण मधुर वचन बोलनेका महत्त्व  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.84.4 
एतदेकपदं शक्र सर्वलोकसुखावहम्।
आचरन् सर्वभूतेषु प्रियो भवति सर्वदा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
चीनी! यह एक ही वस्तु समस्त जगत के लिए सुखदायक है। जो व्यक्ति इसका आचरण करता है, वह सभी जीवों का प्रिय होता है। 4॥
 
Sugar! This one thing is soothing for the entire world. The person who puts this into practice is always loved by all living beings. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)