श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 84: इन्द्र और बृहस्पतिके संवादमें सान्त्वनापूर्ण मधुर वचन बोलनेका महत्त्व  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.84.3 
बृहस्पतिरुवाच
सान्त्वमेकपदं शक्र पुरुष: सम्यगाचरन्।
प्रमाणं सर्वभूतानां यशश्चैवाप्नुयान्महत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पतिजी बोले- इन्द्र! जिस वस्तु का एक ही नाम है, वह है सान्त्वना (मीठे वचन बोलना)। जो मनुष्य इसका भली-भाँति अभ्यास करता है, वह सब प्राणियों का प्रिय होता है और महान यश प्राप्त करता है॥ 3॥
 
Brihaspatiji said- Indra! The only thing which has only one name is consolation (speaking sweet words). A person who practices it well becomes the favourite of all creatures and achieves great fame.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)