भीष्म कहते हैं - हे कुन्तीपुत्र! जिस प्रकार इन्द्र ने अपने पुरोहित बृहस्पति के कहने पर सब कुछ वैसा ही किया था, उसी प्रकार तुम भी इन सान्त्वनादायक वचनों को यथावत् आचरण में लाओ।॥11॥
Bhishma says - O son of Kunti! Indra did everything in the same manner when his priest Brihaspati said so. Similarly, you should also put these comforting words into practice properly. ॥ 11॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि इन्द्रबृहस्पतिसंवादे चतुरशीतितमोऽध्याय:॥ ८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवादविषयक चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)