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mahabharat 12.83.8-9h: राजा सदैव उत्तम कुल में उत्पन्न, विनयशील, संकेतों को समझने वाले, क्रूरता (दया) से रहित, देश के नियमों को समझने वाले तथा अभीष्ट कार्य की सिद्धि और स्वामी का हित चाहने वाले मनुष्यों को ही सब कार्यों के लिए अपना मंत्री बनाए। 8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  12.83.8-9h 
कुलीनान् शीलसम्पन्नानिङ्गितज्ञाननिष्ठुरान्।
देशकालविधानज्ञान् भर्तृकार्यहितैषिण:॥ ८॥
नित्यमर्थेषु सर्वेषु राजा कुर्वीत मन्त्रिण:।
 
 
अनुवाद
राजा सदैव उत्तम कुल में उत्पन्न, विनयशील, संकेतों को समझने वाले, क्रूरता (दया) से रहित, देश के नियमों को समझने वाले तथा अभीष्ट कार्य की सिद्धि और स्वामी का हित चाहने वाले मनुष्यों को ही सब कार्यों के लिए अपना मंत्री बनाए। 8 1/2॥
 
May the king always make those people born in a good family, polite, understanding signals, without cruelty (kind), who understand the laws of the country and who want the accomplishment of the desired work and the welfare of the master, as his ministers for all the works. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)