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mahabharat 12.83.7: हे प्रिये! जो लोग निंदित कुल में उत्पन्न हुए हैं, लोभी हैं, क्रूर हैं और निर्लज्ज हैं, वे केवल तब तक ही आपकी सेवा करेंगे जब तक उनके हाथ गीले हैं। 7.   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.83.7 
दौष्कुलेयाश्च लुब्धाश्च नृशंसा निरपत्रपा:।
ते त्वां तात निषेवेयुर्यावदार्द्रकपाणय:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! जो लोग निंदित कुल में उत्पन्न हुए हैं, लोभी हैं, क्रूर हैं और निर्लज्ज हैं, वे केवल तब तक ही आपकी सेवा करेंगे जब तक उनके हाथ गीले हैं। 7.
 
O dear! Those who are born in a condemned family, are greedy, cruel and shameless, will serve you only as long as their hands are wet. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)