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mahabharat 12.83.56: जहाँ गुप्त चर्चा होती हो, वहाँ बौने, कुबड़े, पतले, लंगड़े, अंधे, गूंगे, स्त्रियाँ और नपुंसकों को नहीं आना चाहिए। ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.83.56 
न वामना: कुब्जकृशा न खञ्जा
नान्धो जड: स्त्री च नपुंसकं च।
न चात्र तिर्यक् च पुरो न पश्चा-
न्नोर्ध्वं न चाध: प्रचरेत् कथंचित् ॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
जहाँ गुप्त चर्चा होती हो, वहाँ बौने, कुबड़े, पतले, लंगड़े, अंधे, गूंगे, स्त्रियाँ और नपुंसकों को नहीं आना चाहिए। ॥56॥
 
Dwarfs, hunchbacks, thin, lame, blind, dumb, women and eunuchs should not be allowed to come to the place where secret discussions are held or near it, in front or behind, above or below it. ॥56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)