Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.83.54: राजा को चाहिए कि वह सावधान होकर धर्म, अर्थ और काम में पारंगत किसी ब्राह्मण गुरु के पास जाकर उसका उत्तर जानने के लिए उसकी राय पूछे। जब वह कोई निर्णय दे दे और उसे सब लोग एकमत होकर स्वीकार कर लें, तब राजा को चाहिए कि वह अन्य कोई उपाय न सोचे और उसी मन्त्रमार्ग को कार्य में लगा दे॥ 54॥ | mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा को चाहिए कि वह सावधान होकर धर्म, अर्थ और काम में पारंगत किसी ब्राह्मण गुरु के पास जाकर उसका उत्तर जानने के लिए उसकी राय पूछे। जब वह कोई निर्णय दे दे और उसे सब लोग एकमत होकर स्वीकार कर लें, तब राजा को चाहिए कि वह अन्य कोई उपाय न सोचे और उसी मन्त्रमार्ग को कार्य में लगा दे॥ 54॥
The king should be cautious and go to a Brahmin Guru who is well versed in Dharma, Artha and Kama and ask his opinion to know the answer. When he gives a decision and it is accepted by all the people unanimously, then the king should not think of any other way and should put that same Mantramarga (method of thinking) into action.॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥