Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.83.52: राजा को चाहिए कि वह सदैव ऐसे मन्त्रियों के साथ गुप्त मंत्रणा करे जो मान और क्रोध को जीत चुके हों, अहंकार और ईर्ष्या से रहित हों, तथा जो कायिक, वाचिक, मानसिक, कर्मजन्य और संकेतजन्य - इन पाँचों प्रकार के प्रपंचों से ऊपर उठ चुके हों ॥ 52॥ | mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संविनीय मदक्रोधौ मानमीर्ष्यां च निर्वृता:।
नित्यं पञ्चोपधातीतैर्मन्त्रयेत् सह मन्त्रिभि:॥ ५२॥
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह सदैव ऐसे मन्त्रियों के साथ गुप्त मंत्रणा करे जो मान और क्रोध को जीत चुके हों, अहंकार और ईर्ष्या से रहित हों, तथा जो कायिक, वाचिक, मानसिक, कर्मजन्य और संकेतजन्य - इन पाँचों प्रकार के प्रपंचों से ऊपर उठ चुके हों ॥ 52॥
The king should always hold secret consultations with ministers who have conquered pride and anger and are devoid of ego and jealousy, and who have risen above all five kinds of deceptions - physical, verbal, mental, action-induced and those born from signs. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥