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mahabharat 12.83.51: विद्वान लोग कहते हैं कि राज्य का आधार गुप्तचर्या है और उसका सार गुप्त मंत्रणा है। यहाँ मंत्री केवल अपनी जीविका के लिए राजा के अधीन रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.83.51 
राज्यं प्रणिधिमूलं हि मन्त्रसारं प्रचक्षते।
स्वामिनं त्वनुवर्तन्ते वृत्त्यर्थमिह मन्त्रिण:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
विद्वान लोग कहते हैं कि राज्य का आधार गुप्तचर्या है और उसका सार गुप्त मंत्रणा है। यहाँ मंत्री केवल अपनी जीविका के लिए राजा के अधीन रहते हैं।
 
Learned men say that the basis of a kingdom is espionage and its essence is secret consultation. Ministers follow the king here only for their livelihood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)