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mahabharat 12.83.45: हे मनुष्यों के स्वामी! जो राजा लम्बे समय तक दण्ड धारण करना चाहता है, उसे अपनी गुप्त बातें केवल उसी व्यक्ति से कहनी चाहिए जो शक्तिशाली हो तथा समस्त संसार को अपने वश में कर सके।   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.83.45 
सर्वलोकमिमं शक्त: सान्त्वेन कुरुते वशे।
तस्मै मन्त्र: प्रयोक्तव्यो दण्डमाधित्सता नृप॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जो राजा लम्बे समय तक दण्ड धारण करना चाहता है, उसे अपनी गुप्त बातें केवल उसी व्यक्ति से कहनी चाहिए जो शक्तिशाली हो तथा समस्त संसार को अपने वश में कर सके।
 
O lord of men! A king who wishes to hold the staff for a long time should share his secret advice only with that person who is powerful and can bring the entire world under his control by convincing them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)