Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.83.44: जो संतोषी, सत्पुरुषों द्वारा आदरप्राप्त, सत्य परायण, शूरवीर, पाप से घृणा करने वाला, राज-मंत्रणा को समझने वाला, समय को जानने वाला और वीरता से युक्त है, वही गुप्त मंत्रणा को सुनने की भी क्षमता रखता है ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.83.44 
संतुष्ट: सम्मत: सत्य: शौटीरो द्वेष्यपापक:।
मन्त्रवित् कालविच्छूर: स मन्त्रं श्रोतुमर्हति॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जो संतोषी, सत्पुरुषों द्वारा आदरप्राप्त, सत्य परायण, शूरवीर, पाप से घृणा करने वाला, राज-मंत्रणा को समझने वाला, समय को जानने वाला और वीरता से युक्त है, वही गुप्त मंत्रणा को सुनने की भी क्षमता रखता है ॥44॥
 
One who is content, respected by good men, faithful to the truth, brave, hates sin, understands the royal advice, knows the time and is full of bravery, he also has the ability to listen to the secret advice. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)