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mahabharat 12.83.41: जिसकी बुद्धि तीव्र और ग्रहणशक्ति प्रबल है, जो अपने देश में उत्पन्न हुआ है, जो शुद्ध आचरण वाला और विद्वान है, तथा जो सब प्रकार के कार्यों में परखा जाकर निर्दोष सिद्ध हुआ है, वही गुप्त मंत्रणा सुनने का अधिकारी है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.83.41 
कृतप्रज्ञश्च मेधावी बुधो जानपद: शुचि:।
सर्वकर्मसु य: शुद्ध: स मन्त्रं श्रोतुमर्हति॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जिसकी बुद्धि तीव्र और ग्रहणशक्ति प्रबल है, जो अपने देश में उत्पन्न हुआ है, जो शुद्ध आचरण वाला और विद्वान है, तथा जो सब प्रकार के कार्यों में परखा जाकर निर्दोष सिद्ध हुआ है, वही गुप्त मंत्रणा सुनने का अधिकारी है ॥ 41॥
 
He who has a sharp intellect and a strong grasping power, who is born in his own country, who is of pure conduct and learned, and who has been proved blameless after being tested in all kinds of activities, is entitled to listen to secret advice. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)